हमारा ब्रह्मांड इसके जन्म के पास से ही आश्चर्यजनक चीजों से भरा हुआ है यहां हर समय विनाश और निर्माण चलता ही रहता है कहीं कोई नई गैलेक्सी बन गई होती है तो कहीं कोई तारा खत्म हो रहा होता है यह प्रक्रिया लगातार चल रहा है और आगे भी लगातार चलता रहेगा इस ब्रह्मांड में हम कहीं किसी कोने में रहते हैं हमारा घर सौरमंडल के तीसरे ग्रह पृथ्वी पर है हमारा यह खूबसूरत सा सोलर सिस्टम तारों से भरी एक आकाशगंगा के किसी एक कोने में एक छोटे से पॉइंट जैसी जगह में स्थित है जी आकाशगंगा में हमारा यह सोलर सिस्टम है उसे आकाशगंगा को मिल्की वे कहते हैं यह गोल आकार की है और यह करीब 200 से 300 अब तारों का समूह है यही वह जगह है जहां तारों का जन्म होता है जीवन पड़ता है लेकिन हमारी आकाशगंगा इस ब्रह्मांड में अकेली नहीं है हमारे इस ब्रह्मांड में आकाशगंगाए मौजूद है लेकिन इसी के साथ एक सवाल खड़ा होता है कि आकाशगंगाए आई कहां से कैसे इन आकाशगंगाओं का निर्माण हुआ और कैसे हमारे सोलर सिस्टम में रहने वाले ग्रहों और हमारे तारे सूरज का निर्माण हुआ तो इसके लिए हमेंब्रह्मांड के जन्म के समय के पास जाना होगा यह माना जाता है की ब्रह्मांड एक बिन्दु के सामान्य था तब उस समय अचानक से पता नहीं कैसे इसका आकार बढ़ने लगा और कुछ ही सालो में एक बड़ा विस्फोट हो गया और देखते ही देखते पता नहीं कहां से हर जगह पर ब्रह्मांड का जन्म हो गया ब्रह्मांड के जन्म के बाद पूरा ब्रह्मांड आज की तरह इतना सुंदर नहीं था उस समय ब्रह्मांड में चारों ओर सिर्फ गैस ही गैस भरी हुई थी यह गैस काफी समय तक थी। उसी समय अचानक से एक नई ताकत का जन्म हुआ और वह थी ग्रेविटी। ग्रेविटी यानी गुरुत्वाकर्षण के कारण ब्रह्मांड में फैली हुई हाइड्रोजन गैस के परमाणु पास आने लगे क्योंकि ग्रेविटी गैस को एक जगह इकट्ठा करने का काम करती है लगातार गैस के परमाणु एक दूसरे के पास आने लगे और इससे तापमान काफी ज्यादा बढ़ाने लगा तापमान के साथ-साथ ग्रेविटी का मन भी बढ़ता रहा इस समय ग्रेविटी और तापमान के 5 करोड़ डिग्री तक एक साथ बढ़ने से हाइड्रोजन के परमाणु में दूसरे हाइड्रोजन के परमाणु के साथ मिलकर एक नया हीलियम का परमाणु बना लिया और इस समय पहली बार ब्रह्मांड में किसी तारे का जन्म हुआ था और पूरा ब्रह्मांड तारों से भर गया चारों ओर विशाल गैस और कहीं-कहीं जाकर भी छोटे-छोटे तारे लगे वैसे अभी भी ग्रेविटी अपना काम कर रही थी यह ग्रेविटी ही थी जो दूर-दूर तक पहले तारों को एक दूसरे के पास ले आई और देखते ही देखते कुछ लाख सालों के बाद अरबो तारों की एक गोलाकार संरचना बनने लगी और इस तरह से जन्म हुआ पहले आकाशगंगा का इसी के साथ पहले आकाशगंगा का ही जन्म नहीं हुआ बल्की अरबो आकाशगंगाओं का जन्म हो गया लेकिन हर एक आकाशगंगा की ग्रेविटी बहुत ज्यादा थी यह किस कारण से थी यह पता नहीं चल पा रहा था ऐसा लगता था कि आकाशगंगाओं के बीच में कुछ ऐसा है जिससे ग्रेविटी काफी ज्यादा है तो वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ तो है लेकिन वह दिखाई नहीं देता है गणना करने और टेलिस्कोप से देखने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि आकाशगंगाओं के बीच बहुत बड़ी खाली जगह है जिसका द्रव्यमान हमारे सूरज की द्रव्यमान से 40 लाख गुना ज्यादा है इसके अलावा वैज्ञानिकों ने देखा कि जिस तरह से हमारी धरती और दूसरे ग्रह हमारे सूरज की चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं ठीक वैसे ही सारे तारे आकाशगंगा के केंद्र में नजर नहीं आने वाले विशालकाय गैस और भारी द्रव्यमान की किसी पिंड के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं वैज्ञानिकों ने इस भरी और अदृश्य पिंड को नाम दिया ब्लैक होल। वैज्ञानिकों ने जब ब्लैक होल की तलाश शुरू की तो उन्हें मिल्की वे की केंद्र में मिला और यह वैज्ञानिकों के द्वारा खोजा गया पहला और विशालकाय गैस ब्लैक होल था। इसके बाद और आगे बढ़ने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसा सिर्फ हमारी आकाशगंगा भी ही नहीं है बल्कि हर उसे बड़ी आकाशगंगा भी ब्लैक होल है जिसमें अरबो तारे हैं यह काफी विशाल है और ऐसा लगता है कि जैसे हर एक आकाशगंगा का संबंध ब्लैक होल से है तो क्या यह माना जाए कि हमारी आकाशगंगा के निर्माण में इस ब्लैक होल का हाथ है अब बहुत सारे सवाल खड़े होते हैं कि क्या बिना ब्लैक होल के आकाशगंगा का अस्तित्व नहीं है यह इतना विशालकाय ब्लैक होल किसी भी आकाशगंगा के केंद्र तक पहुंचा कैसे इसका आकार बढ़ता गया इसके जवाब में वैज्ञानिकों की रिसर्च कहता है की शुरुआत में जन्मे तारों का निर्माण बहुत ही विशाल तारों के रूप में हुआ था और इस वजह से इनके अंदर का हाइड्रोजन ईंधन कुछ करोड़ सालों में ही खत्म हो गया जिससे इन तारों में विस्फोट हो गया और एक सुपरनोवा तारे के विस्फोट की तरह इसके टुकड़े ब्रह्मांड में बिखर गए विस्फोट के साथ खत्म हुआ यह तारा एक ब्लैक होल में बदल गया और इस तरह से ब्रह्मांड के पहले ब्लैक होल का जन्म हुआ जब यह विशालकाय तारा खत्म हुआ था। उस समय इसका आकार काफी छोटा रहा होगा उनकी खतरनाक ग्रेविटी के कारण यह अपने चारों ओर की चीजों को लगता करोड़ सालों से निकलते रहे और अपना आकर बढ़ते रहे यह सिलसिला आज भी जारी है आज भी आकाशगंगाओं के केंद्र में मिलने वाला ब्लैक होल लगातार अपना आकारऑन को निकलते हुए पढ़ रहा है लेकिन वैज्ञानिक इस थ्योरी को गलत तो नहीं मानते लेकिन इसे सही भी नहीं मानते हैं वैज्ञानिक कहते हैं कि हमें इस चोरी में अभी और भी बहुत कुछ बदलना बाकी है क्योंकि ब्रह्मांड के दूर दराज के इलाकों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के जन्म के बाद कुछ ऐसी रोशनियों का पता लगा है जो काफी ज्यादा चमकदार है की रोशनी इतनी ज्यादा है कि पूरे ब्रह्मांड को राशन कर सकती है लेकिन यह आज मौजूद नहीं है यह रोशनी इतनी ज्यादा है कि 10 20 या 50 आकाशगंगाए मिलकर भी इतनी रोशनी पैदा नहीं कर सकती है वैज्ञानिकों के लिए यह रोशनी एक बड़ा सर दर्द बन गई क्योंकि रोशनी तारों के जन्म के पहले से आ रही थी
कि उनका सामना फिर से एक हैरत अंग्रेज ब्रह्मांड की संरचना से हुआ इस सवाल की जवाब में ब्रह्मांड की अनंत गहराइयों की खाक चांटा वैज्ञानिक पहुंचे एक नई नवेली गैलेक्सी के पास जिसका अभी अभी ही जन्म हुआ है यह काफी छोटी है और इसमें अभी तारों का निर्माण हो रहा है इस नई नवेली गैलेक्सी है नीचे 210 का अध्ययन इसलिए किया जा रहा है ताकि पता लगाया जा सके कि शुरुआती गैलेक्सी का निर्माण किस तरह से हुआ था और उसमें तारों का निर्माण कैसे होता है इस हिना 210 गैलेक्सी को हम हमारी गैलेक्सी का ही शुरुआती रूप मां सकते हैं हम मान सकते हैं कि अपनी शुरुआती दौर में हमारी मिल्की वे गैलेक्सी बिल्कुल ऐसी ही दिखाई देती होगी काफी कम है इसमें बनने वाले तारों का जन्म कुछ लाख साल पहले हीहुआ है तो अब हम इस गैलेक्सी के केंद्र की ओर चलते हैं और पता लगते हैं कि इसकी केंद्र में क्या हो रहा है क्या इसके केंद्र में भी एक ब्लैक होल है या नहीं जब हम इस गैलेक्सी के केंद्र में जाते हैं तो हमें वहां पर एक विशाल ब्लैक होल का पता चलता है इस ब्लैक होल ने तो वैज्ञानिकों की पहली की सभी थ्योरी को तोड़कर के रख दिया यहां मिले ब्लैक होल का आकार लगभग हमारे मिल्की वे गैलेक्सी के ब्लैक होल जितना ही है इस ब्लैक होल का मांस हमारी सूरत से 20 से 30 लाख गुना ज्यादा है अब आप कह सकते हैं कि इसमें चौंकाने वाली क्या बात है क्योंकि हम पहले ही कह चुके हैं कि ब्रह्मांड में नजर आने वाली हर बड़ी गैलेक्सी में ब्लैक होल का होना बहुत जरूरीहै लेकिन इस गैलेक्सी के आजकड़े हम इस गैलेक्सी का फैलाव सिर्फ कुछ हजार प्रकाश वर्ष दूर ही है जबकि हमारे मिल्की वे गैलेक्सी का फैलाव करीब 1 लाख प्रकाश वर्ष जितना है जब है नीचे 210 गैलेक्सी हमारी मिल्की वे गैलेक्सी से काफी छोटी है गैलेक्सी में मिला ब्लैक होल काफी विकसित है और यह साबित करता है कि यह ब्लैक होल इस गैलेक्सी के निर्माण से पहले का है इस खोज से पहले वैज्ञानिक मानते थे कि जैसे-जैसे गैलेक्सी का आकार बढ़ता जाता है वैसे-वैसे उसके मांस और उसमें स्थित तारों को एकजुट करने के लिए बड़े-बड़े ब्लैक होल का निर्माण होता है लेकिन है कि किसी भी गैलेक्सी के निर्माण के लिए ब्लैक होल बहुत जरूरी हैइस सवाल का जवाब देने के लिए की पहले ब्लैक होल इस थ्योरी को कंप्लीट कॉलेज कहते हैं

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